बस्ती में बालिका शिक्षा पर सवाल: JLTRC इंटर कॉलेज में ‘शौचालय’ बना दाखिले की बाधा

बस्ती में बालिका शिक्षा पर सवाल: JLTRC इंटर कॉलेज में ‘शौचालय’ बना दाखिले की बाधा

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Basti (Uttar Pradesh) जनपद बस्ती के बहादुरपुर विकासखंड स्थित झिनकू लाल त्रिवेणी राम चौधरी (JLTRC) इंटर कॉलेज, कलवारी में बालिकाओं के प्रवेश को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि विद्यालय के प्रधानाचार्य आज्ञाराम चौधरी ने लड़कियों को प्रवेश देने से इनकार करते हुए ‘गर्ल्स टॉयलेट न होने’ का कारण बताया।

शनिवार को शेखपुरा, बेलवाडाड़, पकड़ी छब्बर, पड़री और कुसौरा समेत कई गांवों से दर्जनों छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ कॉलेज पहुंचीं। इस दौरान कई छात्राएं प्रतीकात्मक रूप से साइकिल पर टॉयलेट सीट लेकर पहुंचीं और विद्यालय को महिला शौचालय उपलब्ध कराने की पेशकश की, ताकि उनका दाखिला सुनिश्चित हो सके।

हालांकि, आरोप है कि प्रधानाचार्य ने न तो छात्राओं का प्रवेश लिया और न ही शौचालय स्वीकार किया, जिसके बाद सभी को निराश होकर लौटना पड़ा।

इस मामले पर प्रधानाचार्य आज्ञाराम चौधरी का कहना है कि विद्यालय में वर्तमान में बालिकाओं के लिए शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण प्रवेश देना संभव नहीं हो पा रहा है।

मीडिया से बातचीत में छात्राओं ने कहा, “हमें भी सह-शिक्षा और सस्ती शिक्षा का अधिकार है। संविधान ने हमें समानता का हक दिया है, लेकिन हमें उससे वंचित किया जा रहा है। हमारे पास इतने संसाधन नहीं हैं कि हम महंगे निजी स्कूलों में पढ़ सकें।”

शेखपुरा पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि अमरनाथ चौधरी ने कहा, “यहां एडमिशन मिलने से हजारों लड़कियों का भविष्य बेहतर होगा। उनकी शिक्षा से समाज में नए अवसर पैदा होंगे। लेकिन प्रशासन ने न तो अभिभावकों द्वारा लाया गया टॉयलेट स्वीकार किया, न ही खुद व्यवस्था की और न ही एडमिशन दिया—यह हमारे क्षेत्र की बेटियों के अधिकार का मुद्दा है।”

वहीं कुसौरा बाजार से पहुंचे अधिवक्ता आलोक मिश्रा ने कहा कि यह केवल प्रवेश का मामला नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों का प्रश्न है। उन्होंने ग्रामीण जसवंत कुमार के साथ विद्यालय परिसर में बैठकर इस मुद्दे पर संघर्ष करने की बात कही और अभिभावकों को अपने हक के लिए आगे आने का आह्वान किया।

अभिभावकों ने बताया कि वे भले ही आज बिना दाखिले के लौट रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे को जिला प्रशासन के समक्ष उठाकर समाधान की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि वे शौचालय सामग्री प्रशासन को सौंपकर इसे कॉलेज में स्थापित कराने की पहल करेंगे, ताकि बेटियों को शिक्षा से वंचित न रहना पड़े।

इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में बालिका शिक्षा, सह-शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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